TSPC नक्सली संगठन के दो एरिया कमांडरों का आत्मसमर्पण , चतरा पुलिस को मिली सफलता

 TSPC नक्सली संगठन के दो एरिया कमांडरों का आत्मसमर्पण , चतरा पुलिस को मिली सफलता

SRISHTI NEWS JHARKHAND

चतरा:- पुलिस को नक्सल उन्मूलन के क्षेत्र में एक निर्णायक सफलता मिली है. चतरा और पलामू जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंक का पर्याय बने टीएसपीसी नक्सली संगठन के दो खूंखार एरिया कमांडरों ने आग्नेयास्त्रों समेत पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया.

आईजी सुनील भास्कर और चतरा एसपी की उपस्थिति में सरेंडर

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 1 लाख रुपये का इनामी एरिया कमांडर कुलदीप गंझू उर्फ पत्थर उर्फ कुणाल और दूसरा 1 लाख रुपये का इनामी एरिया कमांडर रोहनी गंझू उर्फ रोहनी पाहन शामिल हैं. इन दोनों कुख्यात नक्सलियों ने शुक्रवार को समाहरणालय स्थित सभाकक्ष में बोकारो प्रक्षेत्र के आईजी सुनील भास्कर और चतरा एसपी सुमित कुमार अग्रवाल की उपस्थिति में सरेंडर किया.

दोनों नक्सलियों का रहा है गंभीर आपराधिक इतिहास

सरेंडर करने वाले दोनों नक्सलियों का आपराधिक इतिहास अत्यंत गंभीर रहा है. कुलदीप गंझू उर्फ कुणाल के विरुद्ध चतरा के कुंदा, सदर, मनातु, छतरपुर, प्रतापपुर और गिद्धौर थाना क्षेत्रों में कुल 16 गंभीर मामले दर्ज हैं जबकि रोहनी गंझू के विरुद्ध कुंदा और मनातु थाना क्षेत्रों में कुल 10 मामले दर्ज हैं. आत्मसमर्पण के दौरान इन नक्सलियों ने पुलिस को हथियारों का जखीरा भी सौंपा है. रोहनी गंझू ने एक एसएलआर राइफल और 82 राउंड जिंदा गोली. वहीं कुलदीप गंझू ने एक सेमी राइफल और 103 राउंड जिंदा गोली सौंपी है.

इन नक्सलियों का इतिहास नृशंस वारदातों से भरा है. दोनों ही नक्सली 25 मई 2024 को पंकज बिरहोर और उनके पिता बिफा बिरहोर की गोली मारकर और पत्थर से कुचलकर की गई हत्या के प्रमुख आरोपियों में शामिल थे. इसके अलावा कुलदीप गंझू 7 फरवरी 2024 को अफीम विनष्टीकरण से लौट रहे पुलिस जवानों पर घात लगाकर हमला करने की घटना में भी वांछित था, जिसमें दो पुलिस जवान शहीद हुए थे.

नई दिशा नीति की वजह से सरेंडर कर रहे नक्सली

रोहनी और कुलदीप दोनों ही कुंदा थाना क्षेत्र के अनगड़ा और सिकिदाग के जंगलों में पुलिस के साथ हुई कई मुठभेड़ में भी शामिल रहे थे. चतरा एसपी सुमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि चतरा पुलिस द्वारा चलाए जा रहे लगातार अभियान और बढ़ती दबिश के साथ-साथ, झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 'नई दिशा' के व्यापक प्रचार-प्रसार का परिणाम है.

पुलिस ने गांव-गांव जाकर उग्रवादी संगठनों से जुड़े लोगों के परिजनों को पुनर्वास नीति के बारे में अवगत कराकर मुख्य धारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित किया है. पुलिस की दबिश और टीएसपीसी संगठन के आंतरिक शोषण से क्षुब्ध होकर इन एरिया कमांडरों ने पुलिस से संपर्क साधा और मुख्य धारा में जुड़ने की इच्छा व्यक्त की.

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