भारत युद्ध और संघर्ष के बीच भी मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखता है।

  भारत की "वसुधैव कुटुंबकम (विश्व एक परिवार है) की नीति और उसकी संतुलित विदेश नीति का एक बेहतरीन उदाहरण है। 


सृष्टि न्यूज झारखंड 

संवाददाता :-नंदन कुमार ( ऊँटारी रोड )

पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच मानवीय सहायता भेजना यह दर्शाता है कि भारत युद्ध और संघर्ष के बीच भी मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखता है।

  • मानवीय पहल: भारत ने जीवनरक्षक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की पहली खेप भेजकर यह साफ कर दिया है कि वह संकट के समय अपने सहयोगियों के साथ खड़ा है।

  • ईरान का आभार: राजदूत मोहम्मद फतहली का बयान कि "ईरान भारत को एक दोस्त देश मानता है," दोनों देशों के बीच गहरे रणनीतिक और ऐतिहासिक संबंधों को पुख्ता करता है।

  • क्षेत्रीय स्थिरता: भारत अक्सर इस क्षेत्र में शांति का पक्षधर रहा है। चिकित्सा सहायता भेजना न केवल एक मानवीय कार्य है, बल्कि यह क्षेत्र में सॉफ्ट पावर (Soft Power) के रूप में भारत की भूमिका को भी बढ़ाता है।

  • समान हित: जैसा कि ईरानी राजदूत ने कहा, दोनों देशों के हित साझा हैं, विशेषकर ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय संपर्क (जैसे चाबहार बंदरगाह) के मामले में।

विशेष नोट: भारत की यह सहायता 'ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी' को सौंपी गई है, जो यह सुनिश्चित करती है कि मदद सीधे उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

 


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