बंगाल चुनाव 2026 क्या ममता बनर्जी बनेंगी विपक्ष की नई धुरी? क्षेत्रीय दिग्गजों की एकजुटता ने बढ़ाई हलचल
पश्चिम बंगाल का यह चुनाव केवल 294 सीटों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह भविष्य की उस राजनीति की प्रयोगशाला है जहाँ क्षेत्रीय दल अपनी स्वायत्तता बचाने के लिए एकजुट हो रहे हैं। क्या ममता बनर्जी इन सभी को एक सूत्र में पिरोकर दिल्ली की राह आसान कर पाएंगी? इसका फैसला 4 मई को आने वाले चुनावी नतीजों के साथ होगा।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की तारीखें (23 और 29 अप्रैल) नज़दीक आते ही राज्य की राजनीति अब कोलकाता की गलियों से निकलकर दिल्ली के गलियारों तक गूँजने लगी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) एक बार फिर 'बंगाल की बेटी' के नारे के साथ मैदान में है, लेकिन इस बार मुकाबला सिर्फ राज्य की सत्ता का नहीं, बल्कि 2029 के लिए एक नई 'विपक्षी धुरी' तैयार करने का भी दिख रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में ममता बनर्जी को मिल रहा अन्य क्षेत्रीय दलों का समर्थन भाजपा के खिलाफ एक बड़े गठबंधन का संकेत है।
हेमंत सोरेन (JMM): झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ममता बनर्जी के प्रति अपना समर्थन स्पष्ट कर दिया है। पड़ोसी राज्य होने के नाते सीमावर्ती इलाकों में सोरेन का प्रभाव TMC के लिए मददगार साबित हो सकता है।
तेजस्वी यादव (RJD): बिहार के कद्दावर नेता तेजस्वी यादव ने भी बंगाल में भाजपा की बढ़त रोकने के लिए विपक्षी एकता पर ज़ोर दिया है।
अखिलेश यादव (SP): उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और ममता बनर्जी की केमिस्ट्री जगज़ाहिर है। अखिलेश इसे 'क्षेत्रीय पहचान बनाम केंद्रीय ताकत' की लड़ाई बता रहे हैं।
यह एकजुटता केवल चुनावी समर्थन तक सीमित नहीं है। जानकारों के मुताबिक, यदि ममता बनर्जी 2026 में भारी बहुमत के साथ वापसी करती हैं, तो वे राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा विरोधी मोर्चे (INDIA Bloc या एक नया गठबंधन) की निर्विवाद नेता के रूप में उभर सकती हैं।
बंगाल आज जो सोचता है, भारत कल वो सोचेगा। इस कहावत को चरितार्थ करने के लिए क्षेत्रीय दल एक ऐसा मॉडल तैयार कर रहे हैं जहाँ हर राज्य में वहां का सबसे मज़बूत क्षेत्रीय दल भाजपा को सीधी चुनौती दे।
