उजड़ते परिवार, बढ़ते हादसे चुटूपालू घाटी पर सरकार से कार्रवाई की मांग तेज

 चुटूपालू घाटी आखिर कब रुकेगा मौत का यह सिलसिला? हर दिन हादसे, हर दिन उजड़ते परिवार


नंदन कुमार / सृष्टि न्यूज झारखंड 

झारखंड की चुटूपालू घाटी आज सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि लोगों के लिए  मौत का गलियारा बनती जा रही है। यहां लगभग हर दिन सड़क दुर्घटनाओं की खबरें सामने आती हैं। कभी तेज रफ्तार, कभी ब्रेक फेल, तो कभी सड़क की तकनीकी खामियां—कारण चाहे जो भी हो, लेकिन इसकी कीमत मासूम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है।

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि शायद ही कोई ऐसा सप्ताह गुजरता हो, जब इस घाटी से किसी बड़ी दुर्घटना की खबर न आए। हर हादसे के बाद कई परिवार हमेशा के लिए बिखर जाते हैं। किसी का बेटा, किसी का पिता, किसी की मां या किसी का भाई इस खतरनाक मार्ग का शिकार बन जाता है। पीछे रह जाती हैं केवल चीखें, आंसू और अपनों को खोने का गहरा दर्द।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद अब तक स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए हैं। यदि समय रहते सड़क की तकनीकी खामियों को दूर किया जाए, बेहतर संकेतक लगाए जाएं, सुरक्षा बैरियर मजबूत किए जाएं और यातायात व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए, तो कई हादसों को रोका जा सकता है।

अब सवाल यह है कि आखिर कब जागेगा प्रशासन क्या हर हादसे के बाद केवल जांच और संवेदना ही पर्याप्त है, या फिर ऐसे ठोस कदम उठाए जाएंगे जो भविष्य में लोगों की जान बचा सकें?

चुटूपालू घाटी पर लगातार हो रही दुर्घटनाएं प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए गंभीर चेतावनी हैं। अब समय आ गया है कि इस संवेदनशील मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए, ताकि कोई और परिवार अपने प्रियजन को खोने की पीड़ा न झेले।

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