आयुष्मान आरोग्य मंदिर सतबहिनी में स्वास्थ्य सुविधाओं का भारी अभाव, जिम्मेदार खामोश

 आयुष्मान आरोग्य मंदिर सतबहिनी में स्वास्थ्य सुविधाओं का भारी अभाव, जिम्मेदार खामोश


नंदन कुमार /  सृष्टि न्यूज झारखंड 


सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा करने वाली स्वस्थ व्यवस्था की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई है। झारखंड के सतबहिनी स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में पिछले कई महीने से न दवाइयां हैं, न बिजली और न ही मरीजों के बैठने के लिए कुर्सियां। स्थानीय लोग और कार्यकर्ता बार-बार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन अधिकारी सिर्फ आश्वासन की घुट्टी पिला रहे हैं।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर, सतबहिनी में बुनियादी सुविधाओं का पूर्ण अभाव है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पिछले एक महीने से निम्नलिखित चीजों की भारी किल्लत है महत्वपूर्ण दवाइयों का टोटा मल्टीविटामिन (सिरप और टैबलेट), आई/ईयर ड्रॉप्स, टेलमिसार्टन, ग्लिमेपिराइड, सिट्रीज़िन सिरप, बर्न ऑइंटमेंट (जलन की दवा) और नॉरफ्लोक्सासिन टैबलेट जैसी बुनियादी दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।

आधारभूत संरचना का अभाव अस्पताल में मरीजों के लिए बेड और बैठने के लिए कुर्सियां तक नहीं हैं।

बिजली और पानी का संकट सबसे चिंताजनक बात यह है कि अस्पताल में बिजली आपूर्ति और शुद्ध पेयजल की सुविधा भी बाधित है। सुरक्षा और उपकरण अस्पताल में पंखे, सीसीटीवी कैमरे और मुख्य द्वार जैसी सुरक्षा संबंधी चीजों का भी घोर अभाव है।  

अस्पताल में एएनएम (ANM) और  स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती आवश्यकता है 

स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर सुपरवाइजर राजेंद्र कुमार को कई बार मौखिक रूप से सूचित किया है और लिखित आवेदन भी सौंपा है। बावजूद इसके, कई महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। अधिकारियों की ओर से केवल आश्वासन मिल रहा है, धरातल पर कोई सुधार नहीं हुआ है।

एक तरफ सरकार सबके लिए स्वास्थ्य का नारा दे रही है, वहीं सतबहिनी का यह आरोग्य मंदिर सुविधाओं के लिए तरस रहा है। सवाल यह उठता है कि अगर केंद्र में दवाइयां और बिजली ही नहीं होगी, तो मरीजों का इलाज कैसे होगा क्या जिला स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेगा? या फिर सतबहिनी के मरीजों को इसी तरह भगवान भरोसे छोड़ दिया जाएगा 


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